महायोगी तैलंग स्वामी

तत्व बोध

यह पुस्तक हमें बहुत परिश्रम के बाद लगभग लिखे जाने के १२५ वर्ष बाद मिली थी | इसे कलकत्ता की किसी लाइब्रेरी से खोजने का श्रेय श्री अमर नाथ पोद्दार को जाता है , जिन्होंने इसकी बांग्ला प्रति प्राप्त की थी | मैंने उनसे फोटो कॉपी कराइ थी , उस समय मैं महु जिला इंदौर में पदस्थ था | वहीँ पर वेटेनरी कॉलेज में श्री आइच लेक्चरर के रूप में पदस्थ थे जो बांग्ला जानते थे | मेरे निवेदन पर उन्होंने बांग्ला में पढ़ा, जितना मैं जनता था उसके अनुसार मैंने अनुवाद किया और डॉ आइच ने उसमे कुछ सुधार भी किये | यह पुस्तक मेरे स्टेनो श्री दिलीप ने लिखी और टाइप की | यह केवल मेरे अपने लिए थी परन्तु मुझे लगा कि यह तो ईश्वर का प्रसाद है इसे औरों को भी जानना चाहिए, इसलिए मैंने इसे इंटरनेट के जरिये सार्वजनिक बनाया तथा अपलोड करवाया | यह पुस्तक श्री उमा चरण द्वारा वर्ष १९१७ में प्रथम बार प्रकाशित की गयी थी |

 

अन्य पुस्तकें

यह दोनो पुस्तकें मूल रूप से बांग्ला भाषा में श्री उमा चरण बाबू द्वारा लिखी गयीं हैं| इनका हिन्दी अनुवाद प्रस्तूत किया जा रहा है |

तत्वोपदेश (बारह पाठ)

महावाक़्य रत्नावली